जब जब गुनाहों का सोचा
फिर याद तेरी आई
और कलवरी की धारा
हृदय से यूं चिल्लाई
यीशु तेरे होते गुनाह मैं कैसे करूं
यीशु तेरे होते खता मैं कैसे करूं -2
कभी कभी बगावत करता है मन
तुझसे भी सुंदर लगता है धन -2
सोने की चमक, पैसे की सदा
ताने दे, कौन है तेरा खुदा
तब मैं घुटनों पर झुकता हूं
ग़ालिब आकर यूं कहता हूं
यीशु तेरे होते बिकूं तो कैसे बिकूं -2
यीशु तेरे होते गुनाह मैं कैसे करूं
यीशु तेरे होते खता मैं कैसे करूं -2
ये सच है पाप का ज़ोर है
तेरा इश्क ही इसका तोड़ है -2
लिपटूं तुझसे बच्चे की तरह
हाथों में तेरे डोर है
तू मेरी खातिर पाप बना
ये सोचता हूं तो कहता हूं
यीशु तेरे होते मैं नफरत कैसे करूं -2
यीशु तेरे होते गुनाह मैं कैसे करूं
यीशु तेरे होते खता मैं कैसे करूं -2