**जीवन केवल यीशु में है:**
यीशु मसीह का जीवन और उनके उपदेश हमें इस गहन सत्य की ओर ले जाते हैं कि जीवन की सच्ची पूर्णता और आशा केवल उन्हीं में है। बाइबल इस सत्य को कई स्थानों पर स्पष्ट करती है कि यीशु मसीह ही जीवन का मार्ग, सत्य, और जीवन हैं। आइए बाइबल से कुछ महत्वपूर्ण वचनों के साथ इस विषय को गहराई से समझें।
1. **यीशु ही जीवन का स्रोत है**
बाइबल में स्पष्ट कहा गया है कि यीशु ही जीवन का मूल स्रोत हैं। उनका बिना जीवन संभव नहीं है।
**योहन 14:6**
_"यीशु ने उससे कहा, 'मार्ग, सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता।'"_
इस वचन से स्पष्ट होता है कि हम केवल यीशु के द्वारा ही ईश्वर तक पहुँच सकते हैं। वे न केवल जीवन का मार्ग दिखाते हैं, बल्कि वे स्वयं जीवन हैं। उनका बिना जीवन अधूरा है।
2. **अनंत जीवन का वरदान**
यीशु ने हमें यह आश्वासन दिया है कि जो कोई उन पर विश्वास करेगा उसे अनंत जीवन मिलेगा।
**योहन 3:16**
_"क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए।"_
यह वचन हमें बताता है कि ईश्वर ने अपनी असीमित दया और प्रेम से हमें अनंत जीवन का उपहार दिया है, लेकिन यह उपहार केवल यीशु मसीह में विश्वास के द्वारा मिलता है।
3. **यीशु ही पुनरुत्थान और जीवन हैं**
यीशु ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे ही पुनरुत्थान और जीवन हैं। जो कोई उन पर विश्वास करता है, भले ही उसकी शारीरिक मृत्यु हो जाए, वह अनंत जीवन में प्रवेश करेगा।
**योहन 11:25-26**
_"यीशु ने उससे कहा, 'पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूँ; जो मुझ पर विश्वास करता है, वह यदि मर भी जाए, तौभी जीवित रहेगा। और जो कोई जीवित है और मुझ पर विश्वास करता है, वह कभी नहीं मरेगा। क्या तू इस पर विश्वास करती है?'"_
यह वचन हमारे लिए यह आशा है कि चाहे हमारी शारीरिक मृत्यु हो, हमारा आत्मिक जीवन यीशु के द्वारा सुरक्षित है।
4. **यीशु के बिना जीवन व्यर्थ है**
बिना यीशु के जीवन में कोई सच्ची दिशा, अर्थ या पूर्णता नहीं है। संसार की तमाम चीज़ें अस्थायी हैं और वे हमें स्थायी संतोष नहीं दे सकतीं।
**मत्ती 16:26**
_"मनुष्य यदि सारे जगत को प्राप्त करे, तौभी अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले क्या देगा?"_
यह वचन इस बात को इंगित करता है कि संसार की समृद्धि या शक्ति से अधिक मूल्यवान हमारा आत्मिक जीवन है। केवल यीशु ही हमें उस जीवन की सच्ची पहचान और स्थायी संतोष दे सकते हैं।
5. **जीवन का जल**
यीशु ने खुद को "जीवन का जल" कहा है, जिसका अर्थ है कि वे हमारे आत्मा की प्यास को शांत कर सकते हैं और हमें सच्ची संतुष्टि प्रदान कर सकते हैं।
**योहन 4:13-14**
_"यीशु ने उससे कहा, 'जो कोई इस पानी को पीएगा, वह फिर प्यासा होगा। परन्तु जो कोई उस पानी को पीएगा, जो मैं उसे दूँगा, वह कभी प्यासा न होगा; वरन् जो पानी मैं उसे दूँगा, वह उसमें एक सोते का जल बन जाएगा, जो अनन्त जीवन के लिए उमड़ता रहेगा।'"_
इस वचन से यह सिद्ध होता है कि यीशु मसीह ही हमारे जीवन की सच्ची तृप्ति और शांति हैं। संसार की चीजें हमारी प्यास को कभी भी पूरी तरह शांत नहीं कर सकतीं।
6. **यीशु के साथ जीवन का अर्थ**
बिना यीशु के जीवन का कोई स्थायी अर्थ नहीं है। हमें यह समझना चाहिए कि जब हम यीशु को अपने जीवन का केंद्र बनाते हैं, तो हमें सच्चे अर्थ और उद्देश्य की प्राप्ति होती है।
**प्रकाशित वाक्य 3:20**
_"देख, मैं द्वार पर खड़ा होकर खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर जाकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ।"_
यीशु हमारे जीवन के द्वार पर खड़े हैं और हमें आमंत्रित कर रहे हैं कि हम उन्हें अपने जीवन में स्थान दें। जब हम उन्हें अपने जीवन में स्वीकार करते हैं, तभी हमें जीवन का सच्चा अर्थ और उद्देश्य प्राप्त होता है।
**निष्कर्ष**
यीशु मसीह ही जीवन का स्रोत, मार्ग, और उद्देश्य हैं। बिना उनके जीवन में कोई स्थायित्व, संतोष, या आशा नहीं है। बाइबल के इन वचनों के माध्यम से हमें यह स्पष्ट हो जाता है कि जीवन केवल और केवल यीशु मसीह में है। उनका प्रेम, अनुग्रह और सत्य ही हमें इस जीवन में मार्गदर्शन और अनंत जीवन की आशा प्रदान करते हैं। इसलिए, हमें अपने जीवन का केंद्र यीशु को बनाना चाहिए ताकि हमें सच्ची शांति, तृप्ति और अनंत जीवन की प्राप्ति हो सके।
**"जीवन केवल यीशु में है"** — यही बाइबल का परम सत्य है, और यही हमें अपने जीवन में अपनाना चाहिए।